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बच्चों ने लागाई गुहार:गाँव में स्कूल खुलवाने की मांग

बच्चों ने लागाई गुहार:गाँव में स्कूल खुलवाने की मांग

गाँव में स्कूल खुलवा दो कलेक्टर साहब...बच्चों ने लागाई गुहार

दो साल से शिक्षिका को वेतन नहीं

75 किलोमीटर दूर से स्कूल मांगने पहुंचे बच्चे

गरियाबन्द: स्कूल खुलवाने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय गरियाबन्द से लगभग 75 किलो मीटर दूर मैनपूर विकास खन्ड के भालूपानी मे अध्यनरत 20 छात्र छात्राओं ने कलेक्टर को आवेदन दिया. उल्लखनीय है कि मैनपुर ब्लाक 30 किलोमीटर दूर दुरस्त अंचल में बसा ग्राम भालू पानी मे वर्ष 2014 में आरबीसी के माध्यम से स्कूल खोला गया था. लेकिन उसे 2016 में बंद कर दिया गया.

जिससे बाद वनांचल में बसे ग्रामीणों ने शिक्षा का महत्व समझते हुए गाँव में मीटिंग कर एक शिक्षिका रैयमोतीन नेताम को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी. साथ ही स्कूल को मान्यता दिलाने मांग की गई. लेकिन न ही स्कूल को मान्यता मिली न ही स्कूल में पढ़ाने वाली टीचर को दो वर्षों का वेतन ही मिला. ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुचकर स्कूल की मांग के साथ वहां की शिक्षिका को वेतन देने की मांग कलेक्टर से की.

सरकार द्वारा शिक्षा की स्थिति को सुधारने और ग्रामीण क्षेत्र के हर बच्चे को पढ़ाने की बात कहते हुए हर तीन किलोमीटर में स्कूल खोलने की बात कहती है. लेकिन इस पिछड़े इलाके में लोग तो शिक्षा के प्रति जागरूक है परन्तु स्कूल नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा है. भालुपानी एक ऐसा स्कूल चल रहा है जहां न ही शिक्षक को वेतन मिलता है न बच्चो को पढ़ने के लिए सरकारी पुस्तक कॉपी न ड्रेस न ही मध्यान भोजन, इन सब समस्याओ के निराकरण करने कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया.

ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर द्वारा तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी को बुलाकर स्पष्ट स्थिती जानने के बाद ग्राम भालू पानी से 5 किलोमीटर मोंगराडीह या 16 किलोमीटर दूर ग्राम गरहाडीह में बच्चों को आवासीय स्कूल में स्थापित करने कहा गया. इससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की समस्या का निराकरण तो हो गया परन्तु भालुपानी स्कूल में दो वर्ष तक बच्चो में शिक्षा देने वाली शिक्षिका को वेतन नहीं मिला.


Khushboo

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