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अपने ही घर में कैद बुजुर्ग को एक महीना बाद मिली मुक्ति

सोनारी में 23 सितंबर से घर में ही कैद थे दंपती, बहू को घुसने नहीं दिया

जमशेदपुर. सोनारी खूंटाडीह में अपने ही घर में कैद बुजुर्ग दंपती को एक महीना बाद मुक्ति मिली। बहू ने ताला खोला तो वे बाहर निकले। 23 सितंबर को गेट पर ताला लगाकर बहू चली गई थी। तब से रामलखन प्रसाद और उनकी पत्नी केसरी देवी घर में बंद थे। पड़ोसी और परिवार के दूसरे लोग उन्हें छत या गेट से खाने-पीने का सामान दे रहे थे। बेटे की मौत के बाद दोनों अपनी बहू नीतू देवी को साथ रखना नहीं चाहते थे इसलिए घर में विवाद चल रहा था।

जमकर हुआ हंगामा

इधर, मंगलवार की शाम बहू ने घर के मुख्य गेट का ताला खोल दिया। नीतू को उम्मीद थी कि ताला खोलने पर उन्हें भी घर में रहने दिया जाएगा, लेकिन ससुर ने अंदर घुसने नहीं दिया। इसे लेकर जमकर हंगामा हुआ। आसपास के लोगो ने मामले को शांत कराया।

हमलोग अपने ही घर में कैद थे: रामलखन प्रसाद

नीतू ने कहा पति की मौत के बाद सास-ससुर ने उन्हें घर से निकाल दिया है। उन्हें दो बच्चों के साथ सड़क पर रहना पड़ रहा है। दूसरी ओर, रामलखन प्रसाद ने कहा बहू को संपत्ति में हिस्सा मिलेगा, लेकिन वह साथ में नहीं रह सकती। उसके साथ रहने पर हम पति-पत्नी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। उसने हमारी उम्र का ख्याल नहीं किया और घर के दोनों मुख्य गेट पर 23 सितंबर को ताला लगा दिया था। हमलोग अपने ही घर में कैद थे। इस दौरान काफी परेशानी में रहे।



Khushboo

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