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टीईटी परीक्षा में एससी-एसटी से आगे रहे ओबीसी अभ्यर्थी,हुआ बड़ा खुलाशा

टीईटी परीक्षा में एससी-एसटी से आगे रहे ओबीसी अभ्यर्थी,हुआ  बड़ा खुलाशा

लखनऊ- शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में सामान्य और एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों की तुलना में पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी अधिक चयनित हो रहे हैं। हालांकि औसत प्राप्तांक में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी बाजी मार रहे हैं। वहीं, बीएड के अभ्यर्थियों की तुलना में बीटीसी वालों का परिणाम बेहतर रहा है। द्वितीय भाषा के रूप में अभ्यर्थियों ने संस्कृत और उर्दू की तुलना में अंग्रेजी को ज्यादा पसंद किया। सर्व शिक्षा अभियान के संयुक्त निदेशक अजय कुमार सिंह ने टीईटी 2013, 2014 और 2015 के आंकड़ों से तैयार रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। 2013 टीईटी प्राथमिक स्तर में ओबीसी का परिणाम 22.88 प्रतिशत रहा, जबकि सामान्य वर्ग का 19.64 प्रतिशत रहा। एससी-एसटी का परिणाम 17 प्रतिशत से कम रहा। 2014 में ओबीसी का परिणाम 42.34 प्रतिशत, सामान्य का 37.09 प्रतिशत और एससी-एसटी का 37 प्रतिशत से भी कम रहा। 2015 में ओबीसी का 28.24 प्रतिशत, सामान्य का 20.97 प्रतिशत रहा, एससी का 23.82 प्रतिशत और एसटी का 21.71 प्रतिशत रहा। इन वर्षों में ये रहा परीक्षा परिणाम टीईटी उच्च प्राथमिक स्तर में 2013 में सामान्य वर्ग का परिणाम 4.64 प्रतिशत, ओबीसी का परिणाम 8.99 प्रतिशत रहा, एससी का 4.86 और एसटी का 5.70 प्रतिशत रहा। 2014 में ओबीसी का 24.69 प्रतिशत, सामान्य का 14.51 प्रतिशत, एसटी का 15.22 और एससी का परिणाम 13.51 प्रतिशत रहा। 2015 में ओबीसी का 19.91 प्रतिशत, सामान्य वर्ग का 10.55 प्रतिशत, एससी का 10.09 प्रतिशत और एसटी का परिणाम 10.06 प्रतिशत रहा। टीईटी में चयन कम होने के बावजूद औसत प्राप्तांक में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी एससी-एसटी और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों से आगे हैं। टीईटी 2013 में सामान्य वर्ग का औसत प्राप्तांक 71.64 प्रतिशत था, जबकि ओबीसी का 68.95 प्रतिशत, एससी का 66.85 और एसटी का 65.75 प्रतिशत था। 2014 में सामान्य वर्ग का औसत प्राप्तांक 80.47 प्रतिशत, एससी का 74.35, एसटी का 74.71 और ओबीसी का प्राप्तांक 77.44 प्रतिशत था। 2015 में सामान्य वर्ग का प्राप्तांक 69.15 प्रतिशत, ओबीसी का 68.52 प्रतिशत, एससी का 66.46 प्रतिशत और एसटी का औसत प्राप्तांक 66.92 प्रतिशत रहा। प्राथमिक में विज्ञान, उच्च प्राथमिक में कला के अभ्यर्थी आगे रिपोर्ट के अनुसार, टीईटी प्राथमिक स्तर में कला संकाय के अभ्यर्थियों की तुलना में विज्ञान के अभ्यर्थियों का परिणाम अच्छा रहा है। 2013 टीईटी प्राथमिक स्तर में विज्ञान के अभ्यर्थियों का परिणाम 43.80 प्रतिशत और कला के अभ्यर्थियों का परिणाम 13.47 प्रतिशत रहा। 2014 में विज्ञान के अभ्यर्थियों का परिणाम 69.79 प्रतिशत और कला का 32.49 प्रतिशत रहा। 2015 में विज्ञान के अभ्यर्थियों का परिणाम 59.58 प्रतिशत और कला का परिणाम 16.76 प्रतिशत रहा। उच्च प्राथमिक स्तर में 2013 में कला के अभ्यर्थियों का परिणाम 7.78 प्रतिशत और विज्ञान का परिणाम 3.39 प्रतिशत रहा। 2014 में कला का 19.30 और विज्ञान का परिणाम 15.43 प्रतिशत रहा। 2015 में कला के अभ्यर्थियों का परिणाम 14.16 प्रतिशत और विज्ञान का 13.70 प्रतिशत रहा। उच्च प्राथमिक में अंग्रेजी और उर्दू पर भारी संस्कृत टीईटी में प्राथमिक स्तर में द्वितीय भाषा में संस्कृत और उर्दू पर अंग्रेजी भारी रही है। वहीं, उच्च प्राथमिक स्तर में संस्कृत भाषा अंग्रेजी और उर्दू से आगे रही है। टीईटी उच्च प्राथमिक में 2013 में संस्कृत के अभ्यर्थियों का परिणाम 9.77, अंग्रेजी का 5.84, उर्दू का 7.44 प्रतिशत परिणाम रहा। 2014 में संस्कृत का 25.13 प्रतिशत, अंग्रेजी का 15.55 और उर्दू का परिणाम 20.50 प्रतिशत रहा। 2015 में संस्कृत के अभ्यर्थियों का परिणाम 18.56 प्रतिशत, अंग्रेजी के अभ्यर्थियों का परिणाम 11.47 और उर्दू के अभ्यर्थियों का परिणाम 9.47 प्रतिशत रहा। बीटीसी के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन अच्छा टीईटी में बीएड, स्पेशल बीएड, डीएड, नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग, डिप्लोमा इन टीचिंग कोर्स की तुलना में बीटीसी (डीएलएड) के अभ्यर्थियों का परिणाम बेहतर रहा है। 2014 में प्राथमिक स्तर में बीटीसी के अभ्यर्थियों का परिणाम 42.61 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक स्तर में 42.60 प्रतिशत रहा। 2015 में प्राथमिक स्तर में बीटीसी का परिणाम 26.25 प्रतिशत और उच्च प्राथमिक स्तर में 31.07 प्रतिशत रहा।


Madhu Dheer

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