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विश्वविद्यालय के फर्नीचर घोटाले में दो पूर्व कुलपतियों का नाम आया सामने, एफआईआर दर्ज

विश्वविद्यालय के फर्नीचर घोटाले में दो पूर्व कुलपतियों का नाम आया सामने, एफआईआर दर्ज

आगरा- आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दो पूर्व कुलपति डीएन जौहर और मुजम्मिल समेत 20 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी की संगीन धाराओं में केस दर्ज कराया गया है। इन पर वर्ष 2012 से 2014 के बीच लगभग 1.60 करोड़ की फर्नीचर खरीद में घोटाला करने का आरोप है। 20 आरोपियों में विवि के तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। विजिलेंस ने खुली जांच के बाद इनके खिलाफ हरीपर्वत थाना में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। विजिलेंस की आगरा यूनिट के इंस्पेक्टर छोटे लाल की ओर से दर्ज एफआईआर में बताया गया है कि फर्नीचर खरीद के टेंडर में अनियमितताएं रहीं। कूलर खरीदने में भी टेंडर की नियम एवं शर्तों का पालन नहीं किया गया। परीक्षा चार्ट, डिग्री तैयार करने सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिए माइण्डलॉस्टिटक इंफ्राटेक फर्म को नियम विरुद्ध टेंडर दिया गया। अगले वर्ष बगैर टेंडर के ही काम दे दिया गया। उस समय यह मामला सुर्खियों में रहा था। छात्र नेताओं ने काफी हंगामा किया था। इसके बाद शासन ने विजिलेंस को जांच सौंप दी थी। सभी आरोपी 2012 से 2014 के दौरान तैनात रहे हैं। ये तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारी हैं कुलपति डीएन जौहर और मौहम्मद मुजम्मिल, वित्त अधिकारी रामपटल सिंह, अमर चंद सिंह, कुलसचिव बीके पांडे, गृह विज्ञान संस्थान की निदेशक भारती सिंह, इतिहास विभाग के रीडर अनिल वर्मा, सहायक कुलसचिव परीक्षा अनिल शुक्ला, भौतिक शास्त्र के रीडर बीपी सिंह, उपकुल सचिव परीक्षा प्रभांत रंजन, डिप्टी रजिस्ट्रार वित्त महेंद्र कुमार, वेब मास्टर अनुज अवस्थी हैं। इनके अतिरिक्त टेंडर लेने वाली फर्म में माइंडलोजिक्स इंफ्राटेक , बंगलुरू के प्रोजेक्ट मैनेजर, शैलेंद्र टंडन, वेब फर्म की एमजी रोड निवासी मीनाक्षी मोहन, मोहन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड का आवास विकास निवासी बालेश त्रिपाठी हैं।


Madhu Dheer

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