rajasthan-nikay-chunav-ke-baad-resort-politics

निकाय चुनाव के बाद पार्षदों की घेराबंदी, राजस्थान में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स

राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई जगह पार्षदों को रिजॉर्ट में ठहराए जाने की खबरों के बीच खरीद-फरोख्त और करोड़ों रुपये की कथित बोली के आरोप चर्चा में हैं।

By : Local News of India
निकाय चुनाव के बाद पार्षदों की घेराबंदी, राजस्थान में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद बोर्ड गठन को लेकर सियासी हलचल तेज, पार्षदों के रिजॉर्ट में ठहरने की चर्चा।

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया

अदिति जैन

 

राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब स्थानीय निकायों में बोर्ड गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव परिणाम आने के बाद कई जगह पार्षदों को अपने-अपने खेमे में बनाए रखने की कवायद शुरू हो गई है। इसी बीच पार्षदों को रिजॉर्ट में ठहराए जाने की खबरों ने राजस्थान की सियासत में एक बार फिर ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ को चर्चा में ला दिया है।

निकाय चुनाव में किसी भी दल या समूह को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाली जगहों पर बोर्ड गठन के लिए पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में राजनीतिक दल और स्थानीय नेता निर्दलीय तथा दूसरे खेमों के पार्षदों से संपर्क साध रहे हैं। कई जगहों पर पार्षदों को एक साथ रखने और उनके पाला बदलने की संभावना को रोकने के लिए उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ठहराने की खबरें सामने आई हैं।

इस बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में पार्षदों की कथित खरीद-फरोख्त और करोड़ों रुपये की बोली लगाए जाने के दावे भी चर्चा में हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हुई है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर पार्षदों को प्रभावित करने और सत्ता के लिए जोड़तोड़ करने के आरोप लगा रहे हैं, जबकि संबंधित पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं।

राजस्थान में स्थानीय निकायों के बोर्ड का गठन पार्षदों के समर्थन और बहुमत के आंकड़े पर निर्भर करेगा। जिन निकायों में मुकाबला करीबी है, वहां निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षदों की भूमिका अहम हो सकती है। इसी वजह से चुनाव परिणाम के बाद भी राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं और सभी पक्ष अपने समर्थन वाले पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।

रिजॉर्ट में पार्षदों को ठहराने की राजनीति राजस्थान तक सीमित नहीं है। जब किसी चुनाव में बहुमत का आंकड़ा बेहद करीबी होता है और बोर्ड गठन के लिए कुछ पार्षदों का समर्थन निर्णायक बन जाता है, तब राजनीतिक दल अक्सर अपने समर्थक जनप्रतिनिधियों को एक साथ रखने की रणनीति अपनाते हैं। राजस्थान में निकाय चुनाव के बाद भी इसी तरह की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।

अब नजर इस बात पर है कि अलग-अलग नगर निकायों में बोर्ड गठन के लिए कौन-कौन से समीकरण बनते हैं और पार्षद किसके समर्थन में जाते हैं। बहुमत जुटाने की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही यह साफ होगा कि निकायों की कमान किस राजनीतिक समूह के हाथ में जाती है। फिलहाल चुनाव नतीजों के बाद शुरू हुई यह सियासी कवायद राजस्थान की स्थानीय राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

संबंधित सामग्री

उपचुनाव को शुभेंदु ने बताया मुस्लिमों का ‘टेस्ट’, बोले- साबित करें

उपचुनाव को शुभेंदु ने बताया मुस्लिमों का ‘टेस्ट’, बोले- साबित करें

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अल्पसंख्यक मतदाताओं से सरकार के साथ खड़े होने की अपील की।

अमित शाह के UCC ऐलान के बाद NDA में सियासी खींचतान

अमित शाह के UCC ऐलान के बाद NDA में सियासी खींचतान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

पाकिस्तानी जहाज की भारतीय वॉरशिप से भिड़ंत, भारत सख्त

पाकिस्तानी जहाज की भारतीय वॉरशिप से भिड़ंत, भारत सख्त

भारतीय युद्धपोत से पाकिस्तानी नौसेना के जहाज की टक्कर के मामले में भारत ने कड़ा विरोध जताया है। घटना को लेकर पाकिस्तान के हाई कमिश्नर को बुलाकर आपत्ति दर्ज कराई गई।

मक्का की ओर बढ़ा हूती ड्रोन, सऊदी एयर डिफेंस ने गिराया

मक्का की ओर बढ़ा हूती ड्रोन, सऊदी एयर डिफेंस ने गिराया

मक्का के पास हूतियों का ड्रोन देखे जाने से हड़कंप मच गया। सऊदी अरब ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस ने ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले मार गिराया।

रूस का Su-57E भारत के लिए क्यों खास? जानिए पूरी वजह

रूस का Su-57E भारत के लिए क्यों खास? जानिए पूरी वजह

रूस का Su-57E स्टील्थ जेट भारत की वायुसेना की ताकत बढ़ा सकता है। इसकी स्टील्थ क्षमता, एडवांस्ड तकनीक और मारक क्षमता चीन-पाकिस्तान के मुकाबले भारत को रणनीतिक बढ़त दे सकती है।