लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
अदिति जैन
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक बयान ने सियासी बहस तेज कर दी है। अधिकारी ने दोनों सीटों के अल्पसंख्यक मतदाताओं से सरकार के साथ खड़े होने की अपील करते हुए 6 अक्टूबर के मतदान को उनके लिए “परीक्षा” बताया।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अल्पसंख्यक मतदाताओं के सामने यह तय करने का मौका है कि वे सरकार और मुख्यमंत्री के साथ रहना चाहते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर वे सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और विकास का लाभ लेना चाहते हैं तो 6 अक्टूबर का चुनाव उनके लिए परीक्षा की तरह होगा।
अधिकारी ने यह भी कहा कि यह चुनाव बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक का सवाल नहीं होना चाहिए, बल्कि विकास के आधार पर सभी वर्गों का समर्थन हासिल करने की कोशिश होनी चाहिए। एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने नंदीग्राम में करीब 30 प्रतिशत और रेजिनगर में करीब 70 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी का उल्लेख किया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बीजेपी नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों सीटों पर अपना समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रही है। नंदीग्राम में बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि रेजिनगर में पार्टी ने सखराव सरकार को मैदान में उतारा है। दोनों सीटों पर मुकाबला कई दलों और गुटों के बीच है।
शुभेंदु अधिकारी के बयान पर विपक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव को “परीक्षा” बताने की जरूरत क्यों पड़ी और इस तरह की अपील को लेकर आपत्ति जताई। वहीं तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि चुनाव में बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक के बजाय विकास के मुद्दे पर सभी वर्गों का समर्थन हासिल किया जाना चाहिए।
नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में भवानीपुर सीट बरकरार रखते हुए नंदीग्राम से इस्तीफा दिया। रेजिनगर सीट भी पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई।
दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। उपचुनाव के नतीजे इन सीटों के साथ-साथ राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।