लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
अगर आपने पुराने भारतीय घरों, हवेलियों या पुश्तैनी मकानों को देखा है तो वहां अक्सर भारी-भरकम लकड़ी के दो पल्लों वाले दरवाजे नजर आते हैं। ये किवाड़ केवल पारंपरिक डिजाइन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि इनके पीछे कई व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए थे।
सबसे बड़ी वजह सुरक्षा थी। मोटी लकड़ी और मजबूत कुंडों से बने ये दरवाजे चोरी या जबरन प्रवेश को कठिन बना देते थे। उस समय आधुनिक सुरक्षा उपकरण नहीं होते थे, इसलिए मजबूत किवाड़ ही घर की पहली सुरक्षा दीवार माने जाते थे।
दो पल्लों वाले डिजाइन का एक बड़ा फायदा यह भी था कि रोजमर्रा के उपयोग में केवल एक पल्ला खोला जाता था, जबकि शादी-ब्याह, त्योहार या बड़े सामान को घर के अंदर लाने-ले जाने के समय दोनों पल्ले खोल दिए जाते थे। इससे आने-जाने में सुविधा रहती थी।
पुराने समय में घरों में प्राकृतिक रोशनी और हवा का विशेष ध्यान रखा जाता था। दोनों पल्ले खोलने पर घर में भरपूर हवा और प्रकाश प्रवेश करता था, जिससे गर्मी कम महसूस होती थी और वेंटिलेशन बेहतर बना रहता था।
भारी लकड़ी के ये दरवाजे गर्मी, सर्दी और बारिश जैसे मौसमों से भी बेहतर सुरक्षा देते थे। मजबूत लकड़ी तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती थी, जिससे घर का अंदरूनी वातावरण अपेक्षाकृत आरामदायक रहता था।
इसी कारण पुराने घरों में दो पल्लों वाले किवाड़ केवल एक वास्तुशिल्प परंपरा नहीं थे, बल्कि सुरक्षा, सुविधा, टिकाऊपन और बेहतर जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते थे।