लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
काठमांडू। बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव की तैयारी कर रही है। इस बार सरकार गठन के साथ ही कई पुरानी परंपराओं को बदलने की योजना बनाई गई है, जिसमें पहली कैबिनेट बैठक में ‘100 दिन, 100 एजेंडा’ का प्रस्ताव लाने की तैयारी शामिल है।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने संकेत दिया है कि मंत्रियों द्वारा शपथ के बाद ‘पहला निर्णय’ लेने की परंपरा को इस बार जारी नहीं रखा जाएगा। इसके बजाय कैबिनेट स्तर पर सामूहिक रूप से 100 दिनों के भीतर लागू किए जाने वाले 100 निर्णय लिए जाएंगे।
बालेन्द्र शाह के करीबी नेता कुमार बेन ने बताया कि इस नई व्यवस्था में मंत्री व्यक्तिगत रूप से कोई पहला निर्णय नहीं लेंगे, बल्कि कैबिनेट प्राथमिकताओं के आधार पर सामूहिक रूप से फैसले करेगी। इसके बाद संबंधित मंत्रालय अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में उन निर्णयों को लागू करेंगे, जिससे परिणाम भी स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।
उन्होंने कहा कि इस मॉडल का उद्देश्य लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय परिणाम आधारित कार्यों पर जोर देना है। साथ ही मंत्रियों के कार्य को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई संरचना पर भी विचार किया जा रहा है।
कुमार बेन के अनुसार, प्रत्येक मंत्री की सहायता के लिए चार-चार सांसदों की टीम नियुक्त करने पर आंतरिक स्तर पर चर्चा चल रही है। इस व्यवस्था से निर्णयों के क्रियान्वयन और निगरानी में तेजी और पारदर्शिता लाने की कोशिश की जाएगी।
इससे पहले वनस्थली स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित केंद्रीय समिति और संसदीय दल की संयुक्त बैठक में सभापति लामिछाने ने मंत्री चयन की जिम्मेदारी नेतृत्व पर छोड़ने का आग्रह किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रियों का चयन विशेषज्ञता के आधार पर किया जाएगा और आंतरिक लॉबिंग से बचा जाएगा।