लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
सुप्रीम कोर्ट में महिला खतना यानी Female Genital Mutilation (FGM) को लेकर सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली। मामले की सुनवाई के दौरान एक पक्ष की ओर से दी गई दलील पर जजों ने कड़ी आपत्ति जताई।
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि FGM का उद्देश्य महिलाओं के यौन व्यवहार और सुख से जुड़ा माना जाता है। इस दलील पर अदालत ने सख्त प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाया कि क्या ऐसी प्रथा को संवैधानिक अधिकारों और महिलाओं की गरिमा के खिलाफ नहीं माना जाना चाहिए।
अदालत में महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता, धार्मिक परंपरा और मौलिक अधिकारों को लेकर लंबी बहस हुई। याचिकाकर्ताओं ने FGM को महिलाओं और बच्चियों के स्वास्थ्य तथा मानसिक स्थिति के लिए हानिकारक बताया।
वहीं कुछ पक्षों ने इसे धार्मिक परंपरा से जुड़ा मुद्दा बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी परंपरा को संविधान और मानवाधिकारों की कसौटी पर परखा जाएगा।
FGM को लेकर भारत समेत कई देशों में बहस जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसे महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानता है।