लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
वायनाड-कोझिकोड टनल निर्माण परियोजना से जुड़े 7 जुलाई के भूस्खलन को लेकर कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन ने स्थिति स्पष्ट की है। कोंकण रेलवे ने दावा किया है कि भूस्खलन की घटना टनल की खुदाई वाली जगह पर नहीं, बल्कि उससे करीब 200 मीटर दूर हुई थी। रेलवे के अनुसार, जिस स्थान पर ढलान को स्वीकृत डिजाइन और ड्रॉइंग के मुताबिक सुरक्षित किया गया था, वहां यह घटना नहीं हुई।
कोंकण रेलवे ने जारी बयान में बताया कि भूस्खलन टनल क्राउन से 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हिस्से से शुरू हुआ। ऊंचाई के अंतर के कारण सुरक्षित ढलान के निचले हिस्से पर अचानक भारी दबाव पड़ा, जिसके चलते एक ही झटके में आसपास के पेड़ उखड़ गए और मिट्टी बह गई।
रेलवे के मुताबिक, निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी और मलबा स्थिर था, लेकिन भूस्खलन से आए मलबे का बहाव बेहद अचानक और तेज था, जिसके कारण मौके पर मौजूद कुछ लोग इसकी चपेट में आ गए।
कोंकण रेलवे ने यह भी कहा कि टनल परियोजना में सुरक्षा मानकों और स्वीकृत तकनीकी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा था। कंपनी ने घटना को निर्माण कार्य से सीधे जोड़ने वाली बातों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति अलग है।
वायनाड जैसे पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां घटना के बाद स्थिति की निगरानी कर रही हैं और सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जा रही है।