लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
155 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने दिल्ली और गोवा समेत 7 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की, जहां बैंकिंग लेनदेन, शेल कंपनियों और संदिग्ध वित्तीय दस्तावेजों की जांच की गई।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों को शक है कि बैंक लोन और फंड डायवर्जन के जरिए बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं। मामले में कुछ कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच में AAP से जुड़े कुछ नेताओं और उनके करीबी लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें Deepak Singla और Punjab के मंत्री Sanjeev Arora से जुड़े लिंक की भी जांच हो रही है। हालांकि अभी तक किसी पर आधिकारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं।
ED अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान डिजिटल डिवाइस, बैंक रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन का डेटा कब्जे में लिया है। एजेंसी अब मनी ट्रेल और कथित फर्जी कंपनियों के नेटवर्क की जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की गई। मामले की शुरुआत कथित बैंक फ्रॉड और संदिग्ध लोन ट्रांजैक्शन से जुड़ी शिकायतों के आधार पर हुई थी।
वहीं राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है। AAP नेताओं ने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई सबूतों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े बैंक फ्रॉड मामलों में शेल कंपनियों, रियल एस्टेट निवेश और राजनीतिक कनेक्शन की जांच काफी अहम होती है, क्योंकि इससे फंड फ्लो और लाभार्थियों की पहचान की जा सकती है।