लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
ब्रिटेन में किए गए एक नए अध्ययन में सामने आया है कि दक्षिण एशियाई मूल (South Asian Heritage) की महिलाएं और कम उम्र के लोग एक साथ कई पुरानी बीमारियों, जिसे मल्टीमॉर्बिडिटी (Multimorbidity) कहा जाता है, के अधिक जोखिम में हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वर्ग में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अपेक्षाकृत कम उम्र में ही बढ़ने लगते हैं।
अध्ययन के अनुसार, मल्टीमॉर्बिडिटी का मतलब किसी व्यक्ति में एक साथ दो या उससे अधिक दीर्घकालिक बीमारियों का होना है। इसमें मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, किडनी संबंधी बीमारियां और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि दक्षिण एशियाई समुदाय में यह समस्या अन्य समूहों की तुलना में अधिक तेजी से विकसित हो सकती है।
शोध में विशेष रूप से यह भी पाया गया कि दक्षिण एशियाई मूल की महिलाओं और अपेक्षाकृत युवा आयु वर्ग के लोगों में इस जोखिम की संभावना अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि आनुवंशिक, सामाजिक, आर्थिक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि ऐसे समुदायों में समय रहते स्वास्थ्य जांच, नियमित स्क्रीनिंग और जोखिम कारकों की पहचान पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उनका कहना है कि शुरुआती स्तर पर बीमारी का पता चलने से उपचार और रोकथाम दोनों अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को अधिक समावेशी बनाने में मदद कर सकते हैं, ताकि जोखिम वाले समुदायों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।