लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
शहरों की सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें केवल अंधेरा दूर करने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे किसी भी शहर की सुरक्षा, गतिशीलता और जीवन गुणवत्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग अपराध पर नियंत्रण, सड़क दुर्घटनाओं में कमी और नागरिकों, खासकर महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाती है।
भारत के कई शहरों में अब भी बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें खराब रहती हैं या पर्याप्त रोशनी उपलब्ध नहीं करा पातीं। इससे रात के समय सड़कें सुनसान और असुरक्षित महसूस होती हैं। शहरी योजनाकारों का कहना है कि आधुनिक शहरों में स्ट्रीट लाइटिंग को केवल बिजली के खंभे पर लगी लाइट के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत कई नगर निकाय एलईडी आधारित ऊर्जा दक्ष स्ट्रीट लाइटें और स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम अपना रहे हैं। इनसे बिजली की खपत कम होती है, रखरखाव आसान होता है और आवश्यकता के अनुसार प्रकाश की तीव्रता नियंत्रित की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में स्ट्रीट लाइटें केवल रोशनी देने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि स्मार्ट सेंसर, निगरानी और शहरी प्रबंधन का भी हिस्सा बनेंगी।
शहरी विकास विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी स्ट्रीट लाइटिंग नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाती है, रात के समय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करती है और शहरों को अधिक रहने योग्य बनाती है। उनका मानना है कि आधुनिक और सुव्यवस्थित प्रकाश व्यवस्था किसी भी विकसित और स्मार्ट शहर की पहचान होती है।