लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ATMA) ने कहा है कि वाहनों में कम टायर प्रेशर के कारण भारत को हर साल लगभग ₹4,500 करोड़ मूल्य के ईंधन का नुकसान उठाना पड़ता है। संगठन ने कहा कि सही टायर प्रेशर बनाए रखने से न केवल ईंधन की बचत होती है, बल्कि सड़क सुरक्षा और टायरों की उम्र भी बढ़ती है।
ATMA के अनुसार, कम हवा वाले टायर सड़क के साथ अधिक घर्षण पैदा करते हैं, जिससे इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और वाहन अधिक ईंधन की खपत करता है। इसके अलावा, ऐसे टायर जल्दी घिसते हैं और वाहन की ब्रेकिंग क्षमता तथा नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है।
एसोसिएशन ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे समय-समय पर अपने वाहनों के टायर प्रेशर की जांच कराएं। विशेष रूप से लंबी यात्रा पर निकलने से पहले और मौसम बदलने के दौरान टायरों में निर्धारित दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।
ATMA लंबे समय से टायर सुरक्षा और रखरखाव को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है। संगठन का कहना है कि सही टायर प्रेशर अपनाने जैसी छोटी-छोटी आदतें राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की बड़ी बचत कर सकती हैं और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी योगदान दे सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए मानक के अनुसार टायर प्रेशर बनाए रखने से माइलेज बेहतर होता है, टायरों की कार्यक्षमता बढ़ती है और वाहन चलाने का अनुभव भी अधिक सुरक्षित एवं आरामदायक बनता है।