लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: आज के डिजिटल दौर में बच्चों पर ऑनलाइन पीयर प्रेशर तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, चैट ग्रुप्स और ऑनलाइन कम्युनिटी में बच्चे अक्सर अपने दोस्तों या साथियों की पसंद-नापसंद, लाइफस्टाइल और ट्रेंड्स से प्रभावित हो जाते हैं। इससे कई बार वे बिना सोचे-समझे ऐसे फैसले ले लेते हैं जो उनके लिए सही नहीं होते।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन पीयर प्रेशर तब और अधिक प्रभावी हो जाता है जब बच्चे खुद को दूसरों से तुलना करने लगते हैं। “लाइक”, “कमेंट” और “फॉलोअर्स” जैसी चीजें उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। कई बार बच्चे केवल स्वीकार किए जाने के लिए अपनी असली पहचान या सोच से समझौता कर लेते हैं।
इस स्थिति में पैरेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करना, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को समझना और उन्हें सही-गलत की पहचान सिखाना जरूरी है। साथ ही उन्हें यह भी समझाना चाहिए कि हर ऑनलाइन दिखने वाली चीज असल जीवन का सच नहीं होती।
मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना, निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना और “ना” कहने की आदत सिखाना ऑनलाइन पीयर प्रेशर से बचाव के लिए सबसे प्रभावी उपाय हैं। इसके अलावा, बच्चों को ऐसे सकारात्मक माहौल में रखना चाहिए जहां वे बिना डर अपनी बात रख सकें।