लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने घोषणा की है कि अगले शैक्षणिक सत्र से सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को शामिल किया जाएगा। यह घोषणा उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर की गई।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पश्चिम बंगाल के महान सपूत थे और शिक्षा, सार्वजनिक जीवन तथा राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान नई पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उनके जीवन और कार्यों की जानकारी मिलना आवश्यक है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वे कम उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने, स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री रहे और बाद में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक पूर्ववर्ती माना जाता है।
सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के योगदान को शामिल करने से छात्रों को देश के इतिहास और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर मिलेगा।