लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद सरकार ने कई अधिकारियों को निलंबित किया है, लेकिन इस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल निलंबन से मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी। उनका आरोप है कि पूरे प्रकरण की गहराई से जांच किए बिना कुछ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके।
हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसे सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है और तकनीकी तथा प्रशासनिक पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भवन में आग लगी, वह कागजों में आवासीय था, जबकि वहां लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इस मामले में कई अधिकारियों और भवन मालिकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यभर में अग्नि सुरक्षा मानकों की समीक्षा और विशेष ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।