लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
बिहार के वैशाली जिले की हाजीपुर अदालत ने एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया है जिसने न्याय व्यवस्था की धीमी गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला 34 साल पुराने हत्या प्रयास से जुड़ा हुआ है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1992 में हुई थी।
इस केस में 85 वर्षीय दीप राय समेत कुल पांच लोगों को दोषी करार दिया गया। आरोप था कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर पड़ोसी पर हमला किया और गोलीबारी की थी। मामला वर्षों तक अदालत में लंबित रहा और इस दौरान कई आरोपी या तो उम्रदराज हो गए या उनका निधन हो गया।
कोर्ट ने दीप राय को दोषी मानते हुए पहले 10 साल की सजा सुनाई थी, लेकिन उनकी अत्यधिक वृद्धावस्था और शारीरिक स्थिति को देखते हुए इसे घटाकर 3 साल कर दिया गया। अदालत ने यह भी माना कि इतने लंबे समय तक केस चलना अपने आप में एक तरह की सजा बन चुका है।
अन्य सह-आरोपियों को भी 10-10 साल की सजा सुनाई गई। फैसले के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है क्योंकि एक ओर न्याय मिला, वहीं दूसरी ओर देरी के कारण मानवीय पहलू भी सामने आए।