लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
असम: गौहाटी हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में विदेशी ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक व्यक्ति को विदेशी घोषित किया गया था। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता ने अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए स्कूल प्रमाणपत्र, वोटर आईडी, पैन कार्ड, एनआरसी रिकॉर्ड सहित लगभग 15 दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।
हालांकि हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में कई तरह की विसंगतियां और कानूनी खामियां थीं। अदालत ने कहा कि केवल दस्तावेजों की संख्या पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बीच स्पष्ट लिंक और प्रमाणिकता भी जरूरी है।
न्यायालय ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता अपने पूर्वजों या पारिवारिक संबंधों के साथ नागरिकता का ठोस संबंध स्थापित करने में असफल रहा। इसके अलावा कुछ रिकॉर्ड्स को प्रमाणिक नियमों के अनुसार मान्य नहीं पाया गया, जिससे ट्रिब्यूनल का निर्णय सही ठहरता है।
इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागरिकता मामलों में सबूतों की गुणवत्ता और कानूनी वैधता सबसे महत्वपूर्ण होती है, न कि केवल दस्तावेजों की संख्या।