लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
केंद्र सरकार ने देश के प्रमुख बंदरगाहों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम (GTTP) लागू किया है। इस पहल के तहत पारंपरिक डीजल चालित टग्स को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड टग्स में बदला जा रहा है।
इसके साथ ही बंदरगाहों पर नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उपकरणों और वाहनों का विद्युतीकरण, शून्य-उत्सर्जन ट्रकों की तैनाती और ‘हरित सागर ग्रीन पोर्ट गाइडलाइंस’ के तहत ऑनशोर पावर सप्लाई सिस्टम की स्थापना जैसे कदम भी उठाए गए हैं। इन पहलों से बंदरगाहों पर कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि दीन दयाल उपाध्याय, जवाहरलाल नेहरू, विशाखापत्तनम और वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाहों के लिए इलेक्ट्रिक टग्स के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।
वहीं, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने दीनदयाल बंदरगाह, पारादीप पोर्ट और वीओ चिदंबरनार पोर्ट को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में मान्यता दी है।
इन बंदरगाहों पर ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन, इलेक्ट्रोलाइज़र आधारित संयंत्रों की स्थापना और ग्रीन मेथनॉल बंकरिंग सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। खासतौर पर पारादीप पोर्ट पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत 797.17 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन हाइड्रोजन/अमोनिया हैंडलिंग जेटी विकसित की जा रही है।
सरकार के अनुसार, पिछले दो वर्षों (2023-24 और 2024-25) में बंदरगाह आधुनिकीकरण, तटीय शिपिंग और ग्रीन पोर्ट विकास से जुड़ी करीब 180 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
‘मैरिटाइम इंडिया विजन 2030’ के तहत लक्ष्य रखा गया है कि वर्ष 2030 तक बंदरगाहों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक हो, उपकरणों का 50 प्रतिशत विद्युतीकरण किया जाए, हरित पट्टी का विस्तार 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए और प्रति टन कार्गो पर कार्बन उत्सर्जन में 30 प्रतिशत तक कमी लाई जाए।