गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नई दिल्ली, 9 अप्रैल। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध विरासत और संस्कृति हमेशा यह सिखाती रही है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही उपयोग ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार होता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में लिखा कि आज का युवा इसी मार्ग पर चलते हुए एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने संस्कृत में यह सुभाषित साझा किया—
“अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।
तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥”
प्रधानमंत्री ने इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो ज्ञान हमारे भीतर मौजूद है और जो बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस संसार का वास्तविक सार है। महान और विद्वान व्यक्ति इसी आंतरिक ज्ञान को सर्वोच्च मानते हैं और उसकी उपासना करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की युवा शक्ति इसी मूल्य-आधारित सोच को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।