लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने लोगों से गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही, अब आर्थिक और रणनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सलाह सिर्फ घरेलू बाजार के लिए नहीं, बल्कि भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति और वैश्विक आर्थिक तनाव से भी जुड़ी हुई है।
दरअसल, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और कई अहम वस्तुएं डॉलर में खरीदता है। ऐसे में जब वैश्विक संकट बढ़ता है और डॉलर मजबूत होता है, तो भारत पर दबाव बढ़ने लगता है। पश्चिम एशिया में तनाव और तेल कीमतों में उछाल ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातकों में शामिल है। जब लोग बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं, तो देश को भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव बढ़ सकता है और रुपये की स्थिति कमजोर हो सकती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों का उदाहरण भी चर्चा में है। प्रतिबंधों के चलते रूस को डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय सिस्टम में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसी वजह से अब कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि PM मोदी की अपील का मकसद घबराहट फैलाना नहीं, बल्कि ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा संतुलन बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक करना है। सरकार फिलहाल तेल कीमतों, विदेशी मुद्रा भंडार और आयात-निर्यात स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
हालांकि विपक्ष ने इस बयान को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर हालात इतने गंभीर हैं तो सरकार को जनता के सामने पूरी आर्थिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहि