लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुंबई, 23 मार्च। सातारा ज़िला परिषद अध्यक्ष चुनाव को लेकर विवाद सोमवार को विधान भवन में जोरदार तरीके से गूंजा, जिससे महायुति गठबंधन में तनाव बढ़ गया है और राज्य की राजनीति गरमा गई है। शिंदे गुट के कुछ मंत्रियों ने इस्तीफे तक की चेतावनी दे दी है।
विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सातारा के एसपी तुषार दोशी को निलंबित करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं।
शिंदे गुट के विधायकों ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने संख्या बल न होने के बावजूद जोड़तोड़ की राजनीति कर सातारा जिला परिषद में सत्ता हासिल की है। मंत्री शंभूराज देसाई ने पुलिस प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया। इस मुद्दे को लेकर शिंदे गुट और एनसीपी (एपी) के विधायक नाराज़ नजर आए और उन्होंने विधान भवन की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया।
इस बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में आयोजित बैठक में विधायकों ने तीखी नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि लगातार उनके साथ अन्याय हो रहा है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुछ मंत्रियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जरूरत पड़ी तो वे इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
विधान परिषद में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान उपसभापति नीलम गोरहे के निर्देश के बाद सभापति राम शिंदे ने भाजपा नेता जयकुमार गोरे का पक्ष भी सुना। हालांकि, दोनों पक्षों के आक्रामक रुख के चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय में भाजपा विधायकों की बैठक हुई, जिसमें पार्टी ने स्पष्ट किया कि सातारा जिला परिषद चुनाव को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
दरअसल, सातारा जिला परिषद में भाजपा के 28 सदस्य निर्वाचित हुए थे। इसके बावजूद पार्टी ने शिंदे गुट और एनसीपी (एपी) के पांच सदस्यों को अपने पक्ष में कर सत्ता पर कब्जा कर लिया और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद भी हासिल कर लिए। इसी को लेकर सहयोगी दलों में नाराज़गी बढ़ गई है।