लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
बिहार में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद नई सरकार की सोशल इंजीनियरिंग चर्चा में है। मंत्रीमंडल में अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देकर सत्ता संतुलन साधने की कोशिश की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने OBC, EBC, दलित, सवर्ण और मुस्लिम समुदायों को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन किया है। इसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले व्यापक सामाजिक समीकरण मजबूत करना माना जा रहा है।
Bharatiya Janata Party और Janata Dal (United) ने मिलकर क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर खास फोकस किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति ग्रामीण वोट बैंक और पिछड़े वर्गों को साधने के लिए तैयार की गई है।
कैबिनेट में कई नए चेहरों को मौका मिला है, जबकि कुछ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी गई है। इससे सरकार ने अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।