अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नई दिल्ली, 06 मार्च। आज के समय में रिश्तों की जटिलताएं और भावनात्मक दूरी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। इसी संवेदनशील विषय को केंद्र में रखकर बनी फिल्म ‘ना जाने कौन आ गया’ मॉडर्न रिलेशनशिप्स की अनकही परतों को सामने लाने की कोशिश करती है। विपुल धवन और पूजा अरोड़ा के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म का निर्देशन विकास अरोड़ा ने किया है। यह एक भावनात्मक रिलेशनशिप ड्रामा है, जो प्यार, दूरी और कम्युनिकेशन गैप जैसे मुद्दों को बारीकी से छूती है।
कहानी
फिल्म की कहानी कौशल (जतिन सरना) और टीना (मधुरिमा रॉय) के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हुए एक-दूसरे के करीब आते हैं और जल्द ही उनका रिश्ता शादी में बदल जाता है। शुरुआत में सब कुछ खूबसूरत और सहज लगता है, लेकिन समय के साथ रिश्ते में जिम्मेदारियां, उम्मीदें और व्यस्तताएं बढ़ने लगती हैं।
कौशल अपने करियर और पैसों की दौड़ में इतना व्यस्त हो जाता है कि टीना खुद को अकेला महसूस करने लगती है। बाहर से सब सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर भावनात्मक दूरी बढ़ती जाती है। इसी दौरान टीना की जिंदगी में एक तीसरे व्यक्ति (प्रणय पचौरी) की एंट्री होती है, जो कहानी को नया मोड़ देती है।
परफॉर्मेंस
जतिन सरना ने कौशल के किरदार को सादगी और गंभीरता के साथ निभाया है। उनके अभिनय में किरदार की जटिलता साफ नजर आती है। मधुरिमा रॉय टीना के रोल में बेहद स्वाभाविक और प्रभावी लगती हैं। वहीं प्रणय पचौरी की एंट्री कहानी में नया एंगल जोड़ती है और उनका अभिनय भी प्रभाव छोड़ता है।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
निर्देशक विकास अरोड़ा ने फिल्म को ओवरड्रामा से दूर रखते हुए इसे यथार्थवादी बनाने की कोशिश की है। कुछ हिस्सों में फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस होती है, लेकिन यह कहानी की भावनात्मक गहराई को मजबूत बनाती है।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसकी बड़ी ताकत है। उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशंस को बेहद प्रभावी तरीके से फिल्माया गया है। वहीं संगीत भी कहानी के साथ अच्छा तालमेल बनाता है और रेखा भारद्वाज की आवाज में टाइटल ट्रैक खास प्रभाव छोड़ता है।
फाइनल टेक
‘ना जाने कौन आ गया’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों की उस सच्चाई को दिखाने की कोशिश है, जिसमें लोग साथ रहते हुए भी धीरे-धीरे एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं। यह फिल्म याद दिलाती है कि रिश्ते मजबूत बनाए रखने के लिए समझ, समय और संवाद बेहद जरूरी हैं।
कुल मिलाकर, यह फिल्म मॉडर्न रिलेशनशिप्स की सच्चाई को सामने लाने वाली एक संवेदनशील और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी है।