लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps) यानी गोडावण के संरक्षण अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। गुजरात के कच्छ जिले के नलिया क्षेत्र में ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक से पैदा हुआ दूसरा चूजा सफलतापूर्वक 40 दिन की महत्वपूर्ण अवधि पार कर गया है। इस चूजे का जन्म 21 मई 2026 को हुआ था।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है और इसे IUCN रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है। वर्तमान में जंगलों में इसकी संख्या 150 से भी कम बताई जाती है। इसकी सबसे बड़ी आबादी राजस्थान के थार रेगिस्तान में पाई जाती है, जबकि गुजरात में इसकी संख्या बेहद सीमित है।
‘जंपस्टार्ट’ तकनीक के तहत राजस्थान से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का उर्वर अंडा गुजरात लाया जाता है और उसे जंगली मादा पक्षी के नीचे रखा जाता है, ताकि वह अंडे को से सके और चूजे का पालन कर सके। गुजरात में मौजूद आखिरी कुछ जंगली मादाओं के बांझ अंडों की समस्या को दूर करने के लिए यह तकनीक अपनाई जा रही है।
इस अभियान के तहत पहला जंपस्टार्ट चूजा 26 मार्च 2026 को नलिया के घास के मैदानों में पैदा हुआ था, लेकिन अप्रैल 2026 में वह लापता हो गया था। विशेषज्ञों ने उसके शिकार होने की आशंका जताई थी। अब दूसरे चूजे का 40 दिन से अधिक जीवित रहना संरक्षण कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
राजस्थान के सम और रामदेवरा संरक्षण प्रजनन केंद्रों में 9 जुलाई 2026 तक 98 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड मौजूद थे। वर्ष 2026 के प्रजनन सीजन में कृत्रिम गर्भाधान, प्राकृतिक प्रजनन और जंगल से मिले अंडों के जरिए 26 चूजे पैदा हुए हैं। प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड केंद्र सरकार, भारतीय वन्यजीव संस्थान और राजस्थान-गुजरात वन विभागों के संयुक्त प्रयास से चलाया जा रहा है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि यह परियोजना जल्द ही रिवाइल्डिंग चरण में प्रवेश करेगी।