लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
हिंदी सिनेमा में 'मां' का किरदार हमेशा फिल्मों की भावनात्मक धुरी रहा है। कभी त्याग और ममता की मिसाल बनीं, तो कभी अपने बच्चों की सबसे बड़ी ताकत। समय के साथ मां का यह किरदार भी बदलता गया, लेकिन इसकी अहमियत कभी कम नहीं हुई।
निरूपा रॉय को बॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित ऑन-स्क्रीन मां माना जाता है। 'दीवार', 'अमर अकबर एंथनी' और 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी फिल्मों में उनके निभाए किरदार आज भी याद किए जाते हैं।
रीमा लागू ने 1990 के दशक में मां की छवि को नया रूप दिया। 'हम आपके हैं कौन', 'मैंने प्यार किया' और 'कल हो ना हो' जैसी फिल्मों में उन्होंने आधुनिक और स्नेहिल मां का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीता।
नरगिस ने 'मदर इंडिया' में राधा का अमर किरदार निभाकर भारतीय सिनेमा में मां की सबसे सशक्त छवि पेश की। यह भूमिका आज भी भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में गिनी जाती है।
वहीं जया बच्चन और किरण खेर आज भी फिल्मों में मां के प्रभावशाली किरदार निभा रही हैं। दोनों अभिनेत्रियों ने बदलते दौर के साथ मां के किरदार को नई संवेदनशीलता और मजबूती दी है।