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वेद यज्ञानुष्ठान में गूंजा ज्ञान: स्वामी राम स्वरूप ने बताया यज्ञ का असली अर्थ और महत्व

योल कैंप स्थित वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय यज्ञानुष्ठान के दौरान स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को यज्ञ के सही अर्थ—देवपूजा, संगतिकरण और दान—का महत्व समझाया।

By : Local News of India
वेद यज्ञानुष्ठान में गूंजा ज्ञान: स्वामी राम स्वरूप ने बताया यज्ञ का असली अर्थ और महत्व

वेद यज्ञानुष्ठान में गूंजा ज्ञान: स्वामी राम स्वरूप ने बताया यज्ञ का असली अर्थ और महत्व

लिसिका ग्रोवर 
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 

 

हिमाचल प्रदेश के योल कैंप स्थित वेद मंदिर में 12 अप्रैल से आरंभ हुए 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के दौरान आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। इस अवसर पर स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को यज्ञ की वास्तविक महिमा और उसके गूढ़ अर्थ से अवगत कराया।

उन्होंने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ की व्याख्या करते हुए बताया कि यज्ञ का अर्थ केवल अग्नि में आहुति देना नहीं है, बल्कि यह तीन प्रमुख सत्कर्मों—देवपूजा, संगतिकरण और दान—का समन्वय है। स्वामीजी ने कहा कि यज्ञ तभी पूर्ण माना जाता है, जब उसमें माता-पिता, अतिथि, आचार्य और परमेश्वर की सेवा शामिल हो।

उन्होंने ऋग्वेद और सामवेद के मंत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि आहुति वेद मंत्रों के साथ ही दी जानी चाहिए। वर्तमान समय में कई स्थानों पर यज्ञ की परंपरा को गलत रूप में अपनाया जा रहा है, जो वेदों के सिद्धांतों के विपरीत है।

स्वामी राम स्वरूप ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे भारत की प्राचीन संस्कृति और वेदों की शिक्षाओं को अपनाएं। उन्होंने कहा कि इससे समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा मिलेगा। यज्ञानुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं और वेदों के ज्ञान को अपने जीवन में उतारने का संकल्प ले रहे हैं।