लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
हुगली, 23 मार्च। भारतीय वैज्ञानिकों ने देश में कॉकरोच की एक नई प्रजाति की पहचान की है। इस प्रजाति का नाम नियोलोबोप्टेरा पेनिन्सुलारिस रखा गया है और यह मुख्य रूप से दक्कन प्रायद्वीप के कृषि क्षेत्रों में पाई जाती है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India) की निदेशक Dhriti Banerjee ने बताया कि यह खोज भारतीय कीट विज्ञान के क्षेत्र में मील का पत्थर है। पहली बार किसी कॉकरोच प्रजाति की पहचान के लिए इंटीग्रेटिव टैक्सोनॉमिक (समेकित वर्गीकरण) पद्धति का उपयोग किया गया।
अध्ययन में पारंपरिक शारीरिक विश्लेषण, जननांग संरचना का सूक्ष्म अध्ययन, डीएनए बारकोडिंग और फाइलोजेनेटिक विश्लेषण जैसे आधुनिक तरीके अपनाए गए। इससे पहले इस वंश की केवल दो प्रजातियां भारत में दर्ज थीं। नई खोज के साथ भारत में कॉकरोच प्रजातियों की संख्या बढ़कर 190 हो गई है।
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि भारत में पाई जाने वाली लगभग 50 प्रतिशत कॉकरोच प्रजातियां एंडेमिक हैं, यानी केवल भारत में ही पाई जाती हैं। आम धारणा के विपरीत, एक प्रतिशत से भी कम कॉकरोच हानिकारक होते हैं, जबकि अधिकांश पर्यावरण में पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और खाद्य श्रृंखला को बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं।
अध्ययन के प्रमुख वैज्ञानिक Basudev Tripathi ने कहा कि यह खोज शुरुआत भर है और भविष्य में डीएनए बारकोडिंग से और भी नई प्रजातियों की पहचान संभव है। यह शोध भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के पुणे और चेन्नई केंद्रों तथा प्रोफेसर रामकृष्ण मोरे आर्ट्स-कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज, पुणे के सहयोग से किया गया और ‘Records of the Zoological Survey of India’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।