गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नई दिल्ली स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज (प्रातः) में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बाबा साहब के साहित्य की प्रदर्शनी, निबंध लेखन प्रतियोगिता और “राष्ट्र निर्माण में अंबेडकर के विचार और विकसित भारत 2047 का मार्ग” विषय पर विशेष व्याख्यानमाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण के साथ गरिमामय वातावरण में हुई। इस आयोजन की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दरविंदर कुमार ने की। मुख्य अतिथि के रूप में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ए.ओ.आर. डॉ. एस.एस. हूडा और पूर्व आईआरएस सहायक आयुक्त श्री राम आधार उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथियों ने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर के विचारों की आज के समय में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को उनके साहित्य, दर्शन और संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया।
प्राचार्य प्रो. दरविंदर कुमार ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए बाबा साहब के प्रसिद्ध संदेश—“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” को दोहराया। उन्होंने कहा कि हम सभी को बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करते हुए देश निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
मुख्य वक्ता श्री राम आधार ने संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए एकता, समानता और सामाजिक न्याय की अवधारणा पर बल दिया। वहीं डॉ. एस.एस. हूडा ने जाति रहित समाज की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। प्रो. मनोज कुमार कैन ने डॉ. अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित चिंतन की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रामवीर ने आयोजन की रूपरेखा बताते हुए ऐसे आयोजनों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. अनुभूति मिश्रा और डॉ. रेशमा तबस्सुम ने प्रभावशाली ढंग से किया।
इस अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थी इबरिश ताबिश, ज्योति सेठ, काजल यादव तथा गैर-शैक्षणिक विभाग के अंकुर और सौरव शाक्य को पुरस्कार प्रदान किए गए।
अंत में वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर राकेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए बताया कि बाबा साहब पर केंद्रित यह व्याख्यानमाला 13 वर्ष पूरे कर चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे पहले अर्जुन राम मेघवाल, असीम अरुण, विवेक कुमार, नरेंद्र जाधव और श्यौराज सिंह बेचैन जैसे कई गणमान्य व्यक्तियों के व्याख्यान भी आयोजित किए जा चुके हैं।
यह आयोजन डॉ. अंबेडकर के विचारों को समझने और समाज में उनके संदेश को प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।