लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
North Korea ने एक बार फिर नए हथियार सिस्टम के सफल परीक्षण का दावा किया है। सरकारी मीडिया KCNA के मुताबिक देश ने AI-guided cruise missile, tactical ballistic missile और advanced artillery rockets का परीक्षण किया। इन परीक्षणों की निगरानी खुद नेता Kim Jong Un ने की।
रिपोर्ट्स के अनुसार नॉर्थ कोरिया अब मिसाइलों में artificial intelligence आधारित target recognition और precision navigation जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध में रूस के साथ बढ़ते सैन्य सहयोग से उसे हथियार तकनीक और battlefield feedback भी मिल रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आर्थिक प्रतिबंधों से घिरे देश के पास इतने वैज्ञानिक और संसाधन कहां से आते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक नॉर्थ कोरिया दशकों से अपने सबसे प्रतिभाशाली छात्रों को विज्ञान, मिसाइल टेक्नोलॉजी और परमाणु अनुसंधान में भेजता रहा है। देश के रक्षा अनुसंधान संस्थानों और सैन्य विश्वविद्यालयों में हजारों वैज्ञानिक और इंजीनियर काम करते हैं।
हालांकि सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि North Korea के missile, cyber और nuclear programs में कई हजार तकनीकी विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा “Academy of Defence Science” जैसे संस्थान हथियार विकास की रीढ़ माने जाते हैं।
फंडिंग की बात करें तो नॉर्थ कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों के भारी प्रतिबंध लगे हैं, लेकिन इसके बावजूद वह कई स्रोतों से पैसा जुटाता है। इनमें अवैध हथियार कारोबार, कोयला और खनिजों की तस्करी, विदेशी श्रमिकों से कमाई, साइबर चोरी और cryptocurrency hacks शामिल बताए जाते हैं। कई रिपोर्ट्स में North Korean hackers पर अरबों डॉलर की crypto चोरी के आरोप लग चुके हैं।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि रूस और चीन के साथ बढ़ते संबंधों ने Pyongyang को आर्थिक और तकनीकी राहत दी है। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद North Korea पर आरोप लगे कि उसने रूस को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई किए, जिसके बदले उसे तकनीकी और आर्थिक मदद मिली।
नॉर्थ कोरिया के पास दुनिया का सबसे छोटा लेकिन तेजी से बढ़ता परमाणु जखीरा माना जाता है। कई अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार उसके पास लगभग 50 परमाणु हथियार हो सकते हैं और वह हर साल नए fissile material का उत्पादन भी कर रहा है।
हाल के वर्षों में Kim Jong Un ने hypersonic missile, tactical nuclear warhead और long-range missile programs पर खास जोर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इन हथियारों का मकसद सिर्फ सैन्य ताकत दिखाना नहीं, बल्कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर रणनीतिक दबाव बनाना भी है।