गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नरेंद्र मोदी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी पर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान देश के अदम्य साहस और संघर्ष का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विभिन्न भाषाओं में पोस्ट करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग के वीरों का साहस और बलिदान स्वतंत्रता, न्याय और मानवीय गरिमा के मूल्यों के प्रति देशवासियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने विदेशी शासन की बर्बरता के खिलाफ शहीदों के संघर्ष को नमन किया और सभी अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया—
“इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम्।
अपघ्नन्तो अराव्णः।।"
इस सुभाषित का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि समाज में परोपकारी और सकारात्मक शक्तियों को बढ़ाना चाहिए, जो विश्व को बेहतर बनाती हैं, और उन ताकतों का विरोध करना चाहिए जो अन्याय, विभाजन और अव्यवस्था फैलाती हैं।
उल्लेखनीय है कि जलियांवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन हुआ था, जब जनरल डायर के आदेश पर निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलाई गई थीं। अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में हुए इस नरसंहार में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए थे।
यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक काला अध्याय मानी जाती है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया और आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी।