लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Iran ने अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के बाद अपने कई अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को फिर से सक्रिय करना शुरू कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों और रक्षा विश्लेषणों में ऐसे संकेत मिले हैं कि कई क्षतिग्रस्त टनल एंट्रेंस और सैन्य रास्तों को दोबारा खोला गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भूमिगत मिसाइल नेटवर्क को निशाना बनाया था। इन हमलों में टनल के प्रवेश द्वार, लॉन्च साइट्स और एक्सेस रोड्स को नुकसान पहुंचाया गया था ताकि मिसाइल सिस्टम की गतिविधियां बाधित की जा सकें।
सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण से पता चला है कि 18 भूमिगत मिसाइल परिसरों के 69 प्रभावित प्रवेश मार्गों में से करीब 50 को फिर से खोल दिया गया है। कई जगह बुलडोजर, डंप ट्रक और भारी मशीनरी की मदद से मलबा हटाया गया और रास्तों की मरम्मत की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने पिछले दो दशकों में अपने मिसाइल नेटवर्क को गहरी चट्टानों और पहाड़ों के नीचे विकसित किया है। इसी वजह से सतही हमलों से टनल एंट्रेंस को नुकसान तो पहुंचा, लेकिन अंदर मौजूद मिसाइल भंडार का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रह सकता है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के पास अब भी बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें भूमिगत भंडारण में मौजूद हैं। अमेरिकी खुफिया आकलनों में भी संकेत मिले हैं कि ईरान ड्रोन उत्पादन और मिसाइल लॉन्चर क्षमता को अपेक्षा से अधिक तेजी से बहाल कर रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई, ड्रोन गिराने और क्षेत्रीय एयरबेस पर हमलों के दावों ने संघर्षविराम की स्थिति को और नाजुक बना दिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि केवल टनल एंट्रेंस को निशाना बनाकर किसी देश की भूमिगत मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है। ईरान की तेज रिकवरी ने भविष्य की सैन्य रणनीतियों को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल ईरान की ओर से इन सैटेलाइट रिपोर्ट्स पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।