लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
चेन्नई/हैदराबाद: वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास हुए दर्दनाक स्पीडबोट हादसे ने 15 भारतीय परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वाले कई पर्यटकों के परिजनों ने बताया कि यात्रा पर निकलने से पहले उन्होंने फोन कर कहा था कि द्वीप पर मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलेगा और होटल लौटने के बाद दोबारा बात करेंगे। लेकिन वह कॉल कभी नहीं आया।
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली निवासी शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद के परिजनों ने बताया कि उन्होंने हादसे से कुछ घंटे पहले परिवार से वीडियो कॉल पर बात की थी। उन्होंने पत्नी, बेटे और अपनी छोटी पोती से बातचीत की और कहा था कि वे एक द्वीप की ओर जा रहे हैं, जहां नेटवर्क नहीं होगा। उन्होंने लौटकर फोन करने का वादा किया था, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद नाव हादसे में उनकी मौत हो गई।
एक अन्य मृतक मुरुगा प्रभु अरुमुगम के भाई ने केंद्र सरकार से पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की अपील की। परिजन लगातार भारतीय दूतावास और प्रशासन के संपर्क में हैं। भारतीय मिशन ने बताया है कि सभी 15 मृतकों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह सिटी पहुंचा दिए गए हैं, जहां से औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें भारत भेजा जाएगा।
यह हादसा उस समय हुआ जब लावा इंटरनेशनल द्वारा आयोजित एक प्रोत्साहन यात्रा के दौरान भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही स्पीडबोट फु क्वोक द्वीप के पास पलट गई। नाव में 32 भारतीय पर्यटक और चालक दल के चार सदस्य सवार थे। हादसे में 15 भारतीयों की मौत हो गई, जबकि 17 लोगों को बचा लिया गया। इनमें से अधिकांश भारत लौट रहे हैं और एक घायल अब भी वियतनाम के अस्पताल में उपचाराधीन है।
वियतनाम पुलिस ने हादसे के बाद स्पीडबोट के कप्तान को जल परिवहन सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया है। वहीं भारत सरकार और भारतीय दूतावास पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने और पार्थिव शरीरों को जल्द स्वदेश लाने की प्रक्रिया में जुटे हैं।