लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
महामृत्युंजय मंत्र के जाप को लेकर किए गए एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि इसका सकारात्मक प्रभाव हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, नियमित और नियंत्रित तरीके से मंत्रोच्चार करने से ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) और हार्ट रेट (हृदय गति) में कमी देखी गई। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष शुरुआती हैं और इन्हें चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
अध्ययन में 30 योग विद्यार्थियों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों से पांच मिनट तक शांति मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराया गया। जाप से पहले, दौरान और बाद में उनके रक्तचाप, हृदय गति और अन्य शारीरिक मानकों को रिकॉर्ड किया गया। परिणामों में पाया गया कि मंत्रोच्चार के बाद प्रतिभागियों के तनाव से जुड़े कई शारीरिक संकेतकों में कमी दर्ज की गई।
शोधकर्ताओं का मानना है कि लयबद्ध मंत्रोच्चार और नियंत्रित श्वास प्रक्रिया शरीर की पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर सकती है, जिससे शरीर को आराम की अवस्था प्राप्त होती है। यही कारण है कि रक्तचाप और हृदय गति में अस्थायी कमी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस अध्ययन का नमूना सीमित था और इसके परिणामों की पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर और अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है। इसलिए उच्च रक्तचाप या हृदय रोग से पीड़ित मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी दवाएं बंद न करें और मंत्र जाप को केवल सहायक अभ्यास के रूप में ही अपनाएं।
महामृत्युंजय मंत्र का उल्लेख वैदिक परंपरा में मिलता है और इसे मानसिक शांति, एकाग्रता तथा आध्यात्मिक साधना से जोड़ा जाता है। आधुनिक शोध अब इसके संभावित शारीरिक प्रभावों को भी वैज्ञानिक दृष्टि से समझने का प्रयास कर रहे हैं।