लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
मध्य प्रदेश की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) तबस्सुम खान को एक लिंचिंग मामले में फैसला सुनाने के बाद सोशल मीडिया पर जान से मारने, रेप की धमकियां और अभद्र टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है। मामला 12 जून को दिए गए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने 2022 के लिंचिंग केस में 14 आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और अन्य अपराधों का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
यह मामला 2022 में नजीर अहमद की पीट-पीटकर हत्या से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार, नजीर अहमद और उनके साथियों पर कथित गोरक्षकों ने गाय तस्करी के संदेह में हमला किया था। अदालत ने इसे भीड़ द्वारा की गई हत्या (मॉब लिंचिंग) का मामला माना और दोषियों को सजा सुनाई।
फैसले के बाद सोशल मीडिया पर जज तबस्सुम खान की धार्मिक पहचान को निशाना बनाते हुए कई आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो साझा किए गए। कुछ वीडियो में उन्हें जान से मारने और दुष्कर्म की धमकी दी गई, जबकि कुछ लोगों ने दोषियों की रिहाई की मांग करते हुए हिंसा भड़काने वाले बयान भी दिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल अन्य आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो की जांच कर रही है। साथ ही न्यायाधीश को पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई गई है।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन समेत कई न्यायिक संस्थाओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने न्यायाधीशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि न्यायाधीश की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। अदालत ने फिलहाल तबस्सुम खान को दी गई सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने के निर्देश दिए हैं।