लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया में कई प्राचीन मंदिरों और धरोहर स्थलों के संरक्षण कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के माध्यम से किया जा रहा है।
Archaeological Survey of India भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करने वाली प्रमुख एजेंसी है, जो पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण का कार्य करती है। यह एजेंसी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तकनीकी सहायता और संरक्षण परियोजनाओं में सहयोग कर रही है।
लाओस में स्थित 5वीं सदी का Wat Phou मंदिर परिसर, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है, वहां ASI संरक्षण कार्य में शामिल है। यह स्थल शिव परंपरा और प्री-अंगकोरियन खमेर वास्तुकला से जुड़ा हुआ माना जाता है।
इंडोनेशिया के Prambanan मंदिर परिसर, जो 9वीं सदी का हिंदू मंदिर समूह है, में भी भारत और इंडोनेशिया के बीच पुनर्स्थापन को लेकर सहयोग चल रहा है। यह परिसर त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और शिव—को समर्पित है।
कंबोडिया का Ta Prohm मंदिर, प्रीह विहियर, वियतनाम का My Son Sanctuary और Dong Duong बौद्ध मठ जैसे स्थलों पर भी भारत संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्य में शामिल है। इनमें कई स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं।
इन प्रयासों से भारत न केवल अपनी सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत कर रहा है, बल्कि एशिया की साझा विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।