लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
भारत में नवजात शिशुओं में होने वाली गंभीर संक्रमण बीमारी नियोनेटल सेप्सिस के इलाज में बढ़ती एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की चुनौती से निपटने के लिए एक मल्टी-सेंटर अध्ययन शुरू किया गया है।
नियोनेटल सेप्सिस 90 दिन से कम उम्र के शिशुओं में होने वाला जानलेवा रक्त संक्रमण है। यह बीमारी विशेष रूप से समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) या कम वजन वाले नवजातों को अधिक प्रभावित करती है और भारत में नवजात मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है।
इस अध्ययन का उद्देश्य संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया, उनके एंटीबायोटिक प्रतिरोध पैटर्न और बेहतर उपचार रणनीतियों को समझना है। शोधकर्ता अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों से मिले आंकड़ों के आधार पर ऐसी रणनीति विकसित करने की कोशिश करेंगे, जिससे नवजातों में मृत्यु दर कम की जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाओं के गलत या अत्यधिक इस्तेमाल से प्रतिरोधी संक्रमण बढ़ रहे हैं। ऐसे में समय पर पहचान, सही उपचार और संक्रमण नियंत्रण के उपाय नवजात स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।