लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत की अधिकतम बिजली मांग (Peak Electricity Demand) वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 300 गीगावाट (GW) तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इससे पहले मई 2026 में देश ने 271 GW की रिकॉर्ड पीक बिजली मांग दर्ज की थी।
देश में बिजली उत्पादन क्षमता में भी लगातार वृद्धि हुई है। उपलब्ध बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 284 GW हो गई है, जबकि 2026 की पहली छमाही में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की क्षमता बढ़कर 8.7 GWh तक पहुंच गई है।
पीक बिजली मांग का अर्थ किसी निश्चित अवधि में बिजली ग्रिड पर दर्ज की गई सबसे अधिक लोड मांग से होता है। इसे आमतौर पर दिन, महीने या साल के आधार पर मापा जाता है। बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, घरेलू खपत, वाणिज्यिक उपयोग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है।
डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में बिजली खपत बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ देश को बिजली उत्पादन, ग्रिड क्षमता और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी।
ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बैटरी स्टोरेज और आधुनिक ग्रिड तकनीक पर भी ध्यान दे रहा है। यह कदम भविष्य में बिजली आपूर्ति की स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।