लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपने हिस्से के जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग की दिशा में "हक का पानी" (Haq Ka Pani) की अवधारणा को प्रमुखता देते हुए स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी दूसरे देश का पानी रोकना नहीं, बल्कि अपने वैध अधिकारों का प्रभावी और पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। इस पहल का केंद्र बिंदु भारत के हिस्से के जल का सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और अन्य विकास कार्यों में बेहतर उपयोग करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों से भारत को आवंटित जल का एक बड़ा हिस्सा पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो सका। इसके पीछे सीमित भंडारण क्षमता, परियोजनाओं में देरी और तकनीकी बाधाओं जैसे कारण रहे हैं। "हक का पानी" पहल के माध्यम से इन चुनौतियों को दूर करते हुए जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन और आधुनिक अवसंरचना पर जोर दिया जा रहा है।
हाल के महीनों में भारत ने यह भी दोहराया है कि सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित (in abeyance) रखने का उसका निर्णय जारी रहेगा। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को देखते हुए उसकी नीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत अपने हिस्से के पानी का प्रभावी उपयोग करता है तो इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में सिंचाई, जल संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का कहना है कि यह पहल अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप भारत के वैध जल अधिकारों के उपयोग पर आधारित है और इसका उद्देश्य देश की जल एवं खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।