लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में फिलीपींस के 23 महीने के जुड़वां भाइयों का एक बेहद दुर्लभ लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। अस्पताल के अनुसार, यह उसके 645 बाल लिवर ट्रांसप्लांट में पहला अवसर है जब जुड़वां बच्चों का एक साथ ट्रांसप्लांट किया गया।
दोनों बच्चों, टायलर और केली, का जन्म समय से पहले हुआ था। जन्म के कुछ ही सप्ताह बाद उनमें लगातार पीलिया और हल्के रंग के मल जैसे लक्षण दिखाई दिए। जांच में पता चला कि वे चोलेडोकल सिस्ट टाइप IVA नामक दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित हैं, जिसने धीरे-धीरे उनके लिवर को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, लिवर प्रत्यारोपण ही उनकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प था।
इस जटिल उपचार की सबसे बड़ी चुनौती दोनों बच्चों के लिए उपयुक्त लिविंग डोनर ढूंढना था। एक बच्चे के लिए उसकी मां ने अपने लिवर का हिस्सा दान किया, जबकि दूसरे बच्चे के लिए उसके मामा आगे आए। दोनों सफल सर्जरी के बाद बच्चों की लिवर कार्यक्षमता सामान्य है और वे स्वस्थ होकर रिकवरी कर रहे हैं।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनुपम सिब्बल ने कहा कि एक ही परिवार के जुड़वां बच्चों को एक साथ लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ना बेहद दुर्लभ स्थिति है। वहीं, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी प्रमुख डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि एक सर्जरी 15 घंटे से अधिक और दूसरी 13 घंटे से ज्यादा चली, जिनमें जटिल सर्जिकल पुनर्निर्माण किया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि यह सफलता आधुनिक चिकित्सा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और परिवार के निस्वार्थ सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि यदि शिशुओं में लंबे समय तक पीलिया या मल का रंग हल्का दिखाई दे तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, क्योंकि समय पर पहचान और उपचार से ऐसे बच्चों की जान बचाई जा सकती है।