लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित बिसरख गांव अपनी अनूठी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के लिए पूरे देश में जाना जाता है। जहां देशभर में दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है, वहीं बिसरख में रावण दहन नहीं होता। स्थानीय लोग रावण को महान विद्वान, भगवान शिव का परम भक्त और अपना पूर्वज मानते हुए उनकी पूजा करते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बिसरख को रावण की जन्मस्थली माना जाता है। गांव का नाम भी रावण के पिता ऋषि विश्रवा के नाम से जुड़ा माना जाता है। इसी कारण यहां दशहरा उत्सव की बजाय शोक और विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जाती है।
गांव के प्राचीन शिव मंदिर को रावण से जुड़ा माना जाता है। यहां श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा के साथ रावण को भी सम्मान देते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के कारण बिसरख देशभर के लोगों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
हाल के वर्षों में यह गांव एक और वजह से चर्चा में रहा, जब यहां पहली बार राम दरबार की भी स्थापना की गई। इसके बावजूद रावण के प्रति स्थानीय श्रद्धा और दशहरे पर रावण दहन न करने की परंपरा आज भी कायम है।