लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक डिस्पोजेबल प्लेट बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारकर 12 मजदूरों को मुक्त कराया, जिन्हें कथित तौर पर महीनों से जबरन काम कराया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, मजदूरों को रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों से नौकरी, भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर फैक्ट्री लाया गया था। वहां पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें फैक्ट्री परिसर में ही बंद कर दिया गया।
आरोप है कि मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था और विरोध करने या घर जाने की बात करने पर उनकी पिटाई की जाती थी। कई मजदूरों ने शरीर पर चोटों के निशान भी दिखाए। कुछ ने बताया कि उन्हें बेहद कम भोजन दिया जाता था और परिवार से संपर्क करने की अनुमति नहीं थी।
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फैक्ट्री मालिक फरार बताया जा रहा है। मामले में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, बाल श्रम कानूनों और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या फैक्ट्री में कुछ मजदूरों की मौत भी हुई थी। सभी बचाए गए मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श भी दिया जा रहा है।
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश देखने को मिला है। कई लोगों ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।