गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों और तेल टैंकरों की जब्ती ने पश्चिम एशिया में नया संकट खड़ा कर दिया है। तेहरान ने अमेरिकी कार्रवाई को खुली “समुद्री डकैती” करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी-झंडे वाले कंटेनर जहाज Touska को होर्मुज स्ट्रेट के पास रोका और कब्जे में लिया। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरानी तेल नेटवर्क को समर्थन दे रहा था। पेंटागन ने कहा कि वह “वैश्विक समुद्री प्रवर्तन” जारी रखेगा।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इसे “एक्ट ऑफ वॉर” यानी युद्ध जैसी कार्रवाई बताया। तेहरान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्धविराम दोनों का उल्लंघन है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को “piracy” यानी समुद्री लूट बताते हुए जवाबी कदमों की चेतावनी दी।
इस तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट—जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई गुजरती है—में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। Reuters के अनुसार, रोज़ाना 125–140 जहाजों की तुलना में अब ट्रांजिट बेहद कम हो गया है, और कई ईरानी तेल टैंकरों को वापस लौटना पड़ा।
अमेरिका ने दावा किया है कि उसने कई ईरान-लिंक्ड जहाजों को रोका है, जबकि ईरान ने भी जवाब में विदेशी कार्गो जहाजों को पकड़कर दबाव बढ़ाया है। इससे वैश्विक तेल बाजार में घबराहट बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पर यह टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान-अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल, इस समुद्री टकराव ने पश्चिम एशिया में युद्ध का “दूसरा फ्रंट” खोल दिया है, जहां हर नई कार्रवाई वैश्विक संकट को और गहरा कर सकती है।