गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान डिंपल यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार महिला सशक्तीकरण के नाम पर “खुद के सशक्तीकरण” का एजेंडा चला रही है।
डिंपल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग कोटा तय करने की मांग पर कायम है। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि वर्ष 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था, तब पूरे विपक्ष ने इसका समर्थन किया था।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि पिछले ढाई वर्षों में जनगणना प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की गई। उनका कहना था कि यदि 2024 में ही जनगणना शुरू हो जाती तो अब तक परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी होती और 2029 तक आरक्षण लागू हो सकता था।
डिंपल यादव ने उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के शासनकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय पंचायती राज में एससी-एसटी के साथ-साथ ओबीसी और सामान्य वर्ग की महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया था।
उन्होंने सरकार पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना जातिगत जनगणना के डेटा के परिसीमन करना केवल सत्ता बचाने की कोशिश है। साथ ही असम में हुए परिसीमन का हवाला देते हुए उन्होंने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
सपा सांसद ने महिला सुरक्षा, अग्निवीर योजना और उत्तर प्रदेश की स्थिति जैसे मुद्दों को भी उठाया और कहा कि सरकार “मुखौटों” के सहारे चल रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता 2029 के चुनाव में इसका जवाब देगी।
अंत में उन्होंने मांग दोहराई कि जब तक पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक यह कानून अधूरा माना जाएगा।