अंजली गुप्ता |
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया l
31 मार्च 2026
Social media पर viral news की होड़ में सच्चाई कुचल रही है—और बढ़ती fake news के लिए हम सब जिम्मेदार हैं
सोशल मीडिया, जिसे कभी अभिव्यक्ति की आज़ादी का सबसे बड़ा मंच माना गया था, आज धीरे-धीरे झूठ और भ्रम यानी fake news की फैक्ट्री में बदलता जा रहा है। Instagram, Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर दिन लाखों खबरें बनती और फैलती हैं, लेकिन उनमें से कितनी सच होती हैं, यह सवाल अब पहले से ज्यादा गंभीर हो चुका है।
कड़वी सच्चाई यह है कि आज लोगों को सच से ज्यादा सनसनी पसंद है। अगर कोई खबर चौंकाने वाली है, तो उसे बिना सोचे-समझे शेयर कर दिया जाता है। किसी को फर्क नहीं पड़ता कि वह जानकारी सही है या गलत। सच की जगह viral news होना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है, और यही प्रवृत्ति fake news को तेजी से बढ़ावा दे रही है।
और सिर्फ आम लोग ही नहीं, कई बार बड़े-बड़े पेज और तथाकथित इन्फ्लुएंसर भी बिना पुष्टि के जानकारी फैलाते हैं। उनके लिए यह सिर्फ views और likes का खेल है, लेकिन इसका असर समाज पर कितना गहरा पड़ता है, इसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता। यही वजह है कि social media पर गलत जानकारी तेजी से फैलती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सोशल मीडिया कंपनियां भी इस समस्या से पूरी तरह अनजान नहीं हैं। उनके एल्गोरिद्म वही दिखाते हैं जो ज्यादा क्लिक और एंगेजमेंट लाता है—चाहे वह झूठ ही क्यों न हो। यानी, सच से ज्यादा फायदा झूठ में है, और यही इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी खामी है, जो fake news को और मजबूत करती है।
अब सवाल यह है कि दोषी कौन है?
सरकार? प्लेटफॉर्म्स? या हम खुद?
सच्चाई यह है कि हम सभी इस समस्या का हिस्सा हैं। हम बिना सोचे-समझे हर चीज़ पर भरोसा कर लेते हैं, हर वीडियो को सच मान लेते हैं और हर पोस्ट को आगे बढ़ा देते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि एक गलत खबर किसी की छवि खराब कर सकती है, समाज में तनाव फैला सकती है और कभी-कभी बड़े नुकसान का कारण भी बन सकती है।
यह समय है खुद से सवाल पूछने का—
क्या हम सच में जागरूक नागरिक हैं, या सिर्फ “forward करने वाली मशीन” बन चुके हैं?
अगर social media को सच का मंच बनाना है, तो सबसे पहले हमें खुद बदलना होगा। हमें हर खबर को आंख बंद करके मानने की बजाय उसे परखना सीखना होगा। वरना वह दिन दूर नहीं जब सच और झूठ के बीच की रेखा पूरी तरह मिट जाएगी।
सोशल मीडिया एक ताकत है, लेकिन यह ताकत तभी फायदेमंद है जब इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाए। अगर fake news और गलत viral news पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो यह समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम भी कर सकती है।