गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Bilaspur के मगरपारा-तालापारा क्षेत्र में स्थित Shri Bajrang Panchayat Mandir केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की एक अनूठी परंपरा का प्रतीक है।
करीब एक सदी पुराने इस मंदिर में हनुमानजी को साक्षी मानकर पंचायत लगाई जाती थी, जहां लोग अपने विवादों को सुलझाने के लिए पहुंचते थे। उस दौर में दिए गए फैसले अंतिम माने जाते थे और समाज के सभी वर्गों द्वारा स्वीकार किए जाते थे।
इस पंचायत की खास बात यह थी कि यहां धर्म, जाति या वर्ग का कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। हिंदू, मुस्लिम और ईसाई—सभी समुदायों के लोग बराबरी से अपनी बात रखते थे, जो सामाजिक सौहार्द की मिसाल थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत अंग्रेजी शासनकाल में हुई थी, जब खुले स्थान पर हनुमानजी की स्थापना कर पंचायत लगाई जाती थी। समाज के बुजुर्ग निष्पक्ष रूप से दोनों पक्षों की बात सुनकर निर्णय देते थे।
उस समय प्रशासनिक व्यवस्था सीमित होने के कारण लोग अदालतों के बजाय इस पंचायत पर ज्यादा भरोसा करते थे। यहां विवादों का समाधान जल्दी और सरल तरीके से हो जाता था।
आज भले ही न्यायिक व्यवस्था आधुनिक हो चुकी है, लेकिन यह मंदिर अब भी लोगों के बीच आस्था, विश्वास और सामाजिक एकता की ऐतिहासिक विरासत के रूप में जीवित है।