गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
बिहार में एक बार फिर जाति आधारित गानों को लेकर तनाव बढ़ गया है। चिराग पासवान और लालू यादव समर्थकों के बीच एक समारोह में गाना बजाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। घटना ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि एक समारोह के दौरान चिराग पासवान के समर्थन में बज रहे गाने पर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों में बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।
बिहार की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से जाति आधारित गानों का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। चुनावी मौसम आते ही अलग-अलग नेताओं और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर गाने बनाए जाते हैं। इनमें किसी नेता को “अपनी जाति का नेता” बताकर प्रचार किया जाता है, जिससे समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये गाने सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बन चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में DJ, शादी समारोह, जुलूस और चुनावी रैलियों में ऐसे गानों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इससे जातीय पहचान और राजनीतिक वफादारी को मजबूत करने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू सामाजिक तनाव के रूप में सामने आता है। जब एक समुदाय विशेष के समर्थन में गाना बजता है, तो दूसरे समूह में विरोध की भावना पैदा होती है। कई बार यही टकराव हिंसा और मारपीट तक पहुंच जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में जहां जातीय समीकरण चुनावी राजनीति का बड़ा आधार हैं, वहां ऐसे गानों का प्रभाव और भी ज्यादा होता है। यही कारण है कि चुनावी समय में इनका ट्रेंड और तेज हो जाता है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन यह घटना साफ दिखाती है कि अब गाने सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक संघर्ष का नया हथियार बन चुके हैं।
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