गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Board of Secondary Education Assam द्वारा आयोजित हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (HSLC) परीक्षाओं के परिणामों में पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
1994 में जहां पास प्रतिशत महज 30.9% था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 65.62% हो गया है। यह बदलाव राज्य की शिक्षा प्रणाली में हुए निरंतर सुधार को दर्शाता है, जिसमें बेहतर बुनियादी ढांचा, आधुनिक शिक्षण पद्धतियां और छात्रों की बढ़ती भागीदारी अहम भूमिका निभा रही हैं।
1990 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में परिणाम अपेक्षाकृत कमजोर रहे। 1997 में सबसे कम 28.9% छात्र ही पास हो पाए थे। हालांकि 2005 में पहली बार पास प्रतिशत 50% के पार पहुंचा, जो एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
2011 से 2016 के बीच परिणाम अपेक्षाकृत स्थिर रहे और 60% से ऊपर बने रहे। 2013 में 70.7% का उल्लेखनीय आंकड़ा दर्ज किया गया। लेकिन 2017 में अचानक गिरावट आई और पास प्रतिशत घटकर 47.9% रह गया।
इसके बाद परिणामों में फिर सुधार हुआ। 2021 में महामारी के दौरान वैकल्पिक मूल्यांकन प्रणाली के चलते रिकॉर्ड 93.1% पास प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह असाधारण उछाल परिस्थितिजन्य था।
महामारी के बाद परिणाम सामान्य स्तर पर लौटे—2022 में 56.4%, 2023 में 72.6% और 2024 में 75.7% तक पहुंचे। 2025 में थोड़ी गिरावट के बाद 2026 में 65.62% के साथ स्थिरता देखने को मिली है।
शिक्षाविदों के अनुसार, यह सुधार सरकारी पहलों, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस प्रगति को बनाए रखने के लिए नीतिगत स्तर पर निरंतर ध्यान और सुधार आवश्यक हैं।