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अल-अक्सा को लेकर फिर बढ़ा विवाद, अमेरिका-इजरायल की रणनीति पर उठे सवाल

यरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों के बीच यह सवाल उठ रहा है

By : Local News of India
अल-अक्सा को लेकर फिर बढ़ा विवाद, अमेरिका-इजरायल की रणनीति पर उठे सवाल

यरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को लेकर फिर तेज हुई राजनीतिक और धार्मिक बहस।

लिसिका ग्रोवर 
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया

 

 

Al-Aqsa Mosque को लेकर मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों के बाद यह चर्चा तेज हुई है कि क्या इजरायल और अमेरिका इस इलाके की मौजूदा धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की दिशा में बढ़ रहे हैं।

अल-अक्सा मस्जिद यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है और इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। इस पूरे परिसर को मुसलमान “हरम अल-शरीफ” जबकि यहूदी “Temple Mount” कहते हैं। फिलहाल इस परिसर की धार्मिक देखरेख जॉर्डन समर्थित Islamic Waqf के पास है।

1948 और खासकर 1967 के बाद से यरुशलम को लेकर इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद लगातार बना हुआ है। हालांकि इजरायल सुरक्षा नियंत्रण रखता है, लेकिन धार्मिक प्रबंधन की जिम्मेदारी जॉर्डन समर्थित वक्फ के पास बनी हुई है। यही व्यवस्था “status quo” कहलाती है।

हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायल के कुछ दक्षिणपंथी समूह और नेता Temple Mount पर यहूदी प्रार्थना अधिकारों को और बढ़ाना चाहते हैं। इससे मुस्लिम देशों और फिलिस्तीनी संगठनों में चिंता बढ़ी है। आलोचकों का आरोप है कि इससे धीरे-धीरे मौजूदा व्यवस्था बदल सकती है।

अमेरिका की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यकाल में यरुशलम को इजरायल की राजधानी मान्यता दिए जाने और अमेरिकी दूतावास वहां शिफ्ट होने के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया था।

हालांकि अमेरिका और इजरायल की ओर से अल-अक्सा मस्जिद “कब्जाने” जैसी किसी आधिकारिक योजना की पुष्टि नहीं की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और राजनीतिक प्रचार में कई बार अतिरंजित दावे भी सामने आते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय स्रोतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

जॉर्डन ने कई बार साफ किया है कि वह अल-अक्सा और इस्लामी पवित्र स्थलों की अपनी custodianship को लेकर किसी बदलाव को स्वीकार नहीं करेगा। दूसरी ओर फिलिस्तीनी संगठन भी इसे “रेड लाइन” बताते रहे हैं।

अल-अक्सा परिसर को लेकर किसी भी तरह का बदलाव पूरे मध्य पूर्व में बड़े तनाव और हिंसा का कारण बन सकता है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस संवेदनशील मुद्दे पर बनी हुई है।

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